RGA History

आश्‍चर्य होता है कि दक्षिण भारत में प्रवासी राजस्थानी स्नातकों की एक जीवन्त संस्था गत 59 वर्षों से निरन्तर अपनी सेवाएँ समाज को समर्पित करने में सक्षम रही हों। ऐसा कोई विषय नहीं बचा होगा, जिसको राजस्थानी स्नातक संघ ने नहीं छुआ होगा। सार्वजनिक रूप से व्याख्यान, गोष्ठियाँ, परिचर्चाएँ व सभाएँ – समाज व राष्ट्र हित में चिन्तन – जागृति, सतर्कता, वैचारिक मंथन – दिशा निर्देश के अन्तर्गत उत्थान, क्रान्ति, समाधान व मार्गदर्शन – सहायता व सेवा में कन्या विवाह, शिक्षा, पुस्तकालय व सभागृह – विकास व सहयोग में प्रतिभा, व्यक्‍तित्व, प्रशिक्षण व कार्यवृत्त – सम्मान व अभिनन्दन में शिक्षक, छात्र, उपलब्धि व योग्यता के अतिरिक्‍त कई ऐसे अनभिज्ञ विषय है जिस तक एक साधारण व्यक्‍ति नहीं पहुँच पाता, ऐसे विषयों की खान है राजस्थानी स्नातक संघ। संघ के विगत 59 वर्षों के इतिहास की कुछ जानकारियाँ आप तक पहुँचाने का प्रयत्न कर रहे हैं। संस्था की स्थापना से लेकर अब तक इस संघ में जिन्होंने अपना योगदान दिया है व अपना नाम रोशन किया है वे महानुभाव आज अपने-अपने क्षेत्र में इतने सक्षम होने के बाद भी इस संस्था को नहीं भूलते। इस संस्था के माध्यम से अब तक लगभग 500 विषयों पर विभिन्न विशेषज्ञों, ज्ञानियों, आलोचकों, राजनीतिज्ञों, चिन्तकों, धर्मात्माओं आदि के व्याख्यान सम्पन्न हुए हैं, जो कि सारगर्भित के साथ-साथ भावार्थी भी रहे हैं। साथ ही इस बात पर संघ को गर्व है कि संघ द्वारा अब तक लगभग 10000 विद्यार्थियों ने इसका लाभ उठाया है, जिसमें से आज कई बड़े व्यवसायी, उद्योगपति, प्रोफेसर, चार्टर्ड अकाउण्टेन्ट, वकील, डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, राजनीतिज्ञ, साहित्यकार, समाज शास्त्री, अर्थशास्त्री आदि हैं, जिन्होंने हैदराबाद में ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों व देशों में भी वर्चस्व बनाये हुए हैं।

आज समय, स्थान, परिस्थिति को देखते हुए राजस्थानी स्नातक संघ ने अन्य गतिविधियों के साथ अब मुख्य व आवश्यक रूप से शिक्षा पर अधिक ध्यान देने के उद्देश्य से ज़रूरतमन्द उच्च शिक्षा प्राप्‍त करने वाले विद्यार्थियों को आर्थिक सहयोग प्रदान करने का संकल्प लिया है। शिक्षा, सेवा, जागृति निरन्तर, वर्ष दर वर्ष, नवीन ऊर्जा एवं लगन से जारी है।